आयुष मानक उपचार प्रोटोकॉल लांच किया गया

6 अक्टूबर 2020 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने “आयुष मानक उपचार प्रोटोकॉल” जारी किया। इसमें निवारक स्वास्थ्य उपायों पर स्व-देखभाल के दिशानिर्देश शामिल हैं।

मुख्य बिंदु

इस प्रोटोकॉल का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय के प्रोटोकॉल भी अपग्रेड किए गए। यह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के साथ समन्वय में किया गया था। मंत्री ने COVID-19 के प्रबंधन के लिए आयुर्वेद और योग पर आधारित राष्ट्रीय नैदानिक ​​प्रबंधन प्रोटोकॉल भी जारी किया।

आयुर्वेद और योग पर राष्ट्रीय नैदानिक ​​प्रबंधन प्रोटोकॉल

यह प्रोटोकॉल आयुष मंत्रालय द्वारा गठित एक राष्ट्रीय कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर विकसित किया गया था। कटोच समिति द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर टास्क फोर्स की स्थापना की गई थी। समिति द्वारा की गई सिफारिशों के अधिकांश क्रियान्वित किए गए थे।

प्रमुख प्रोटोकॉल निम्नलिखित हैं :

  • यह प्रोटोकॉल उच्च जोखिम वाली आबादी के लिए गुडुची घाना वटी, च्यवनप्राश और अश्वगंधा जैसी दवाओं के उपयोग का सुझाव देता है।
  • COVID-19 संक्रमित रोगियों को पिप्पली, गुडूची और आयुष की 64 गोलियाँ प्रदान की जाएंगी।
  • भारत के नागरिकों के लिए अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।
  • COVID-19 रोगियों के लिए योग प्रोटोकॉल में शामिल हैं।
  • प्रोटोकॉल में ली जाने वाली दवाओं की खुराक का भी उल्लेख है।

प्रोटोकॉल तैयार करते समय, मंत्रालय ने निम्नलिखित पहलुओं पर विचार किया

  • आयुर्वेद क्लासिक्स और अनुभव से ज्ञान
  • अनुभवजन्य साक्ष्य और जैविक संभाव्यता
  • चल रहे नैदानिक ​​अध्ययन के उभरते रुझान।

कटोच समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री और थोक दवाओं के विनिर्माण के लिए मेगा पार्क की स्थापना।
  • 5% ब्याज उपकर के माध्यम से आसान सॉफ्ट लोन का प्रावधान जोड़ना
  • आयकर छूट को अपग्रेड करना।
  • उन्नत परीक्षण प्रयोगशाला अवसंरचना का निर्माण।

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