ई-इन्वॉइसिंग पर सरकारी अधिसूचना

केंद्र सरकार ने 500 करोड़ से अधिक के कारोबार के लिए केंद्रीय ई-इन्वॉइसिंग योजना प्रस्तुत की है। हाल ही में योजना के अनुसार,  500 से अधिक करोड़ रुपए के कारोबार वाले सभी व्यवसायों के लिए उनके बी2बी इनवॉइस उत्पन्न करने के लिए सेण्टरलाइज़्ड पोर्टल का उपयोग करना होगा।

नई प्रणाली क्यों?

अब तक, सभी कंपनियां, स्मॉल-कैप, मिड-कैप या लार्ज-कैप चालान बनाने के लिए अपने स्वयं के तंत्र का उपयोग करती हैं। ये इनवॉयस कंपनी के लिए अलग-अलग हैं और खरीदार के साथ हेरफेर करने या किसी अन्य जालसाजी करने के लिए आसानी से जाली इनवॉइस बनाया जा सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के साथ मिलकर एक पहल शुरू की है, जिसमें 500 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसाय के लिए B2B बिक्री के लिए केंद्रीकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से ई-इनवॉइस जनरेट करना अनिवार्य होगा।

पृष्ठभूमि

इस प्रणाली के बारे में चर्चा पहली बार पिछले साल नवंबर में शुरू हुई थी। उस समय प्रस्ताव इस प्रणाली 100 करोड़ रुपए से अधिक कारोबार के लिए इसे अनिवार्य बनाने की योजना थी और इसे 1 अप्रैल से  कार्यान्वित किया जाना था। हालाँकि, कुछ तकनीकी खराबी के कारण, सिस्टम समय पर नहीं आ सका।

लाभ

एकल केंद्रीकृत ई-इन्वॉइसिंग प्रणाली के बहुत सारे फायदे हैँ। व्यवसायों के लिए रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया बहुत आसान हो जाएगी क्योंकि इस केंद्रीकृत प्रणाली की शुरुआत के बाद बिना किसी देरी के इनवॉइस डेटा आसानी से कैप्चर हो जाएगा। जालसाजी के लिए नकली चालान जनरेशन कम हो जाएगा और अंत में हटा दिया जाएगा। जीएसटी विभाग के पास वास्तविक समय डेटा तक पहुंच होगी।

 

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