केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के लिए किया इंजेती श्रीनिवास समिति का गठन

केन्द्रीय कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय ने इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इंजेती श्रीनिवास कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के सचिव हैं। यह समिति मौजूदा फ्रेमवर्क की समीक्षा करेगी और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर नीति के लिए रोडमैप तैयार करेगी।

मुख्य बिंदु

यह समिति कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के सन्दर्भ में समय-समय पर जारी किये गये अधिनियम, नियम तथा सर्कुलर की समीक्षा करेगी। यह समिति CSR गतिविधियों के परिणामों, कार्यक्रमों तथा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करेगा। यह समिति टेक्नोलॉजी के उपयोग तथा लेखापरीक्षा से सम्बंधित कार्य के लिए सुझाव भी देगी। यह समिति अपनी पहली बैठक के तीन महीने बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR)

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नामक पहल की शुरुआत पर्यावरण तथा सामाजिक कल्याण कार्यों में कंपनियों के स्वेच्छिक योगदान के लिए की गयी थी। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि कंपनियां समाज से ही आय प्राप्त करती हैं अतः उन्हें भी समाज के लिए कुछ योगदान देना चाहिए।

कंपनी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 135 में CSR की व्यवस्था की गयी है। मौजूदा नियम के तहत CSR के बारे में निर्णय लेने की शक्ति कंपनी के बोर्ड को दी गयी है। इस नियम के अनुसार 500 करोड़ रुपये शुद्ध मूल्य अथवा 1000 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर अथवा 5 करोड़ से अधिक शुद्ध लाभ करने वाली कंपनी को पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ के औसत का 2% CSR सम्बन्धी कार्यों के लिए खर्च करना पड़ता है। CSR गतिविधियों का वर्णन सातवीं अनुसूची में है।

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