कॉस्मिक येति क्या है?

वैज्ञानिकों ने गलती से शुरुआती ब्रह्मांड में ‘एक बड़ी आकाशगंगा में पैरों के निशान’ की खोज की है जो पहले कभी नहीं देखी गई थी, इसे कॉस्मिक येति कहा गया है।। खोज ब्रह्मांड में कुछ सबसे बड़ी आकाशगंगाओं के पहले बढ़ते कदमों में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। खगोलीय निष्कर्ष एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित किए गए थे।

कॉस्मिक येति

वैज्ञानिकों ने नवनिर्मित बड़ी आकाशगंगा को मिथकीय येति के समान माना है क्योंकि पहले वैज्ञानिक समुदाय आमतौर पर इन आकाशगंगाओं को उनके अस्तित्व के साक्ष्य की कमी को देखते हुए लोककथाओं के रूप में मानते थे, लेकिन हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में खगोलविद उसकी तस्वीर को बनाने में कामयाब रहे।

मुख्य निष्कर्ष

हाल के अध्ययन में पाया गया युवा ब्रह्मांड की कुछ सबसे बड़ी आकाशगंगाएं बहुत जल्दी परिपक्व हो जाती हैं, यह एक ऐसी चीज है जिसे अभी तक सैद्धांतिक रूप से नहीं समझा गया है।

“कॉस्मिक येति” आकाशगंगा अभी तक धूल के बादलों से छिपी हुई थी और मिल्की वे के रूप में कई सितारे थे। यह मिल्की वे की तुलना में 100 गुना अधिक तेज गति से नए सितारे बना रहा था।

प्रमुख पहेली बनी हुई है कि ये परिपक्व आकाशगंगाएं कहीं से भी निकलती दिखाई देती हैं क्योंकि खगोलशास्त्री इन्हें बनाते हुए कभी खोज नहीं पाते हैं। लेकिन अब नई खोज ब्रह्मांड के शैशव काल में अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है।

अनुसंधान दल ने अटाकामा लार्ज मिलीमीटर एरे (ALMA) का उपयोग करते हुए रोशनी की खोज की और अनुमान लगाया कि इस आकाशगंगा से प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 12.5 बिलियन साल लगे हैं।

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