चीन के बेईदोउ उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ने वैश्विक सेवाएं शुरू की

हाल ही में चीन के बेईदोउ उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ने वैश्विक सेवाएं शुरू कर दी हैं। इस नेविगेशन प्रणाली को अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के प्रतिद्वंदी के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान चीन के नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करने वाला पहला विदेशी राष्ट्र होगा।

चीन का बेईदोउ नेविगेशन सिस्टम अमेरिका के जीपीएस, रूस के GLONASS तथा यूरोपीय संघ के गैलिलियो के बाद विश्व का चौथा नेविगेशन सिस्टम है।

बेईदोउ उपग्रह नेविगेशन प्रणाली

‘बेईदोउ’ उपग्रह नेविगेशन परियोजना को औपचारिक रूप से वर्ष 1994 में शुरू किया गया था। चीन की योजना वर्ष 2018 तक बेईदोउ सेवा का विस्तार “बेल्ट एंड रोड” परियोजना के आसपास के देशों में करने की है ।

बेईदोउ प्रणाली में 30 उपग्रह होंगे और इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह उपग्रह प्रणाली अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रूस के ग्लोनास, और यूरोप के गैलीलियो नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का समकक्ष होगा बेईदोउ वर्तमान में चीन के भीतर नेविगेशन और पड़ोसी क्षेत्रों को सेवा प्रदान कर रहा है। इसके नामित ग्रहपथ में प्रस्थापित होते ही यह दुसरे स्थापित उपग्रहों में शामिल हो जाएगा ।

भारत की नेविगेशन प्रणाली

IRNSS (Indian Regional Navigation System) NAVIC एक क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है जो सटीक रियल-टाइम पोजिशनिंग तथा टाइमिंग सेवा उपलब्ध करवाती है, यह भारत तथा इसके 1500 किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र में कार्य करती है। NAVIC (नाविक) में दो स्तर की सेवाएं प्रदान की जाती है, स्टैण्डर्ड पोजिशनिंग सर्विस तथा सीमित सर्विस। स्टैण्डर्ड पोजिशनिंग सर्विस नागरिक उपयोग के लिए प्रदान की जाती है, जबकि सीमित सेवा सेना समेत कुछ विशिष्ठ यूजर्स को प्रदान की जाती है। नाविक सिस्टम  में उपग्रहों की संख्या को 7 बढ़ाकर 11 किये जाने की योजना है।

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