टोक्यो 2020 : टोक्यो ओलंपिक्स में सुरक्षा के लिए किया जायेगा फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग

टोक्यो 2020 ओलिंपिक में सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए फेशिअल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली टेक्नोलॉजी) का उपयोग किया जायेगा। इसके लिए आयोजकों ने जापान की बड़ी सूचना व प्रौद्योगिकी कंपनी NEC से हाथ मिलाया। यह ऐसा पहला ओलिंपिक होगा जिसमे फेशिअल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

इस फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी में IC चिप्स का उपयोग किया जायेगा, यह स्वतः ही 40 क्रीडा स्थलों में प्रवेश करने वाले लोगों को पहचान सकती है। इस तकनीक का उपयोग दर्शकों के लिए नहीं किया जायेगा, बल्कि खिलाडियों के लिए किया जायेगा। यह टेक्नोलॉजी मात्र 0.3 सेकंड में किसी व्यक्ति के चेहरे को पहचान सकती है, यह दुनिया की सबसे तेज़ फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी का उपयोग मुख्य स्टेडियम, अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण केंद्र और ओलिंपिक विलेज इत्यादि 40 स्थानों पर किया जायेगा। इसके लिए लगभग 3,00,000 खिलाडियों व स्टाफ को अपने फोटोग्राफ ओलिंपिक से पहले सबमिट करने होंगे।

पृष्ठभूमि

ओलिंपिक जैसे प्रतिष्ठित इवेंट में उच्च सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है, टोक्यो ओलिंपिक में लगभग 3,00,000 खिलाडी व स्टाफ हिस्सा लेंगे, उनकी पहचान को वेरीफाई करने के लिय आमतौर पर काफी समय लगेगा, इस लिए खिलाडियों व स्टाफ को अनावश्यक देरी से बचाने के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। इससे पहले NEC इस टेक्नोलॉजी का उपयोग 2016 रियो ओलिंपिक तथा कई एअरपोर्ट में कर चुकी है।

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