देश में वाटर एरोड्रोमड्रोम स्थापित करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने दी मंज़ूरी

केन्द्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय ने देश में वाटर एरोड्रोम (जलीय हवाई हड्डा) स्थापित किये जाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। इस योजना के लिए आरम्भ में पांच राज्य ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और असम को चुना गया है। पहले चरण में चिल्का झील (ओडिशा), साबरमती रिवर फ्रंट तथा सरदार सरोवर बाँध में वाटर एरोड्रोम स्थापित किये जायेंगे।

मुख्य बिंदु

वाटर एरोड्रोम का उपयोग एम्फिबियन वायुयानों (ज़मीन और भूमि पर भी चल सकने वाले वायु यान) के द्वारा हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए किया जायेगा। इस वयुयानों का उपयोग सवारियां ढोने व सामान ढोने के लिए किया जायेगा। इस एरोड्रोम की स्थापना पर्यटन स्थलों व धार्मिक महत्व के स्थानों के निकट की जाएगी।

नागर विमानन निदेशालय (DGCA) ने पहले ही वाटर एरोड्रोम के सम्बन्ध में प्रक्रिया व लाइसेंसिंग इत्यादि के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। बिना लाइसेंस के वाटर एरोड्रोम का उपयोग परिवहन सेवाओं के लिए नहीं किया जा सकता। जारी किया गया लाइसेंस दो वर्ष के लिए वैध होगा। परन्तु शुरू में लाइसेंस 6 महीने के लिए जारी किये जायेंगे।

समुद्री वायुयान

समुद्री वायुयान छोटे पंखों वाले वायुयान होते हैं जो जलीय सतह से उड़ान भरते हैं तथा लैंड करते हैं। इसकी अधोसंरचना संरचना के लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता नहीं होती। इस प्रकार के जहाँ उन क्षेत्रों के लिए उपयोग हैं जो सड़क से काफी दूरी हैं और जहाँ पर हवाईअड्डे की सुविधा नहीं है। इस प्रकार के विमानों को लैंड करने लिए 1 किलोमीटर लम्बी जलीय पट्टी की आवश्यकता होती है, जल स्तर कम से कम 10 फीट होना चाहिए।

Advertisement

Month:

Categories:

Tags: , , , , ,