ध्वनी प्रदूषण को रोकने के लिए उपाय करने के लिए राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिए

हाल ही में राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ध्वनी प्रदूषण मानचित्र तथा ध्वनी प्रदूषण के समाधान के लिए एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया है।

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोएल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ध्वनी प्रदूषण हॉटस्पॉट को ढूंढने तथा विशिष्ट हॉटस्पॉट के अनुसार शहरों का वर्गीकरण करने तथा ध्वनी प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने कहा है कि ध्वनी प्रदूषण को नियंत्रित न करने से नागरिकों मुख्य रूप से नवजात तथा वरिष्ठ नागरिकों  के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मानसिक तनाव में भी वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त ग्रीन पैनल ने ध्वनी प्रदूषण को मॉनिटर करने के लिए उपकरण निर्मित करने तथा ध्वनी प्रदूषण निश्चित सीमा पार करने पर प्रशासन को सूचित करने का सुझाव भी दिया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 में एनजीटी की स्थापना की गयी थी। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो भारत के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण का अधिकार प्रदान करता है। एनजीटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य की न्यूनतम संख्या 10 है तथा प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम संख्या 20 होती है।

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