बिहार सरकार  ने आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण को मंज़ूरी दी

बिहार सरकार ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को सरकारी नौकरी तथा शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण को मंज़ूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री नितीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

हाल ही में केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरी तथा उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की थी। इसके बाद सामान्य वर्ग के उन लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा जो आर्थिक रूप से पिछड़े हुए है।

गुजरात आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए 10% आरक्षण प्रदान करने वाला पहला राज्य है।

इस आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा?

रिपोर्ट के अनुसार इस आरक्षण का लाभ उन्हें मिलेगा जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है तथा जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है।

यह 10% आरक्षण पहले से मौजूद 50% से अधिक हो जायेगा।

इस आरक्षण के लिए सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करना होगा।

क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध है?

मंडल केस में सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए 10% आरक्षण के प्रस्ताव को गलत ठहराया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के मुताबिक सामाजिक पिछड़ेपन के बिना आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ापन आरक्षण का आधार नही बन सकता।

इंद्रा साहनी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था थी नौकरी, शिक्षा तथा विधायिका में कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता।

सरकार इस निर्णय को किस प्रकार लागू कर सकती है?

इस निर्णय को लागू करने के लिए संविधान की नौवीं अनुसूची में परिवर्तन करना  होगा। इसका एक उदारहण तमिलनाडु से सम्बंधित है। तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जातियां व अनुसूचित जनजातियाँ (शैक्षणिक संस्थानों तथा राज्य सरकार के अधीन नियुक्तियों में आरक्षण) अधिनियम, 1993 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया था, इसके द्वारा तमिलनाडु की आरक्षण सीमा को 69% पर रखा गया है। हालाँकि इस कानून को न्यायिक जांच से होकर भी गुज़रना पड़ेगा।

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