भारत-अमेरिका-इज़राइल शिखर सम्मेलन: 5जी प्रौद्योगिकी में सहयोग

भारत, इज़राइल और अमेरिका ने हाल ही में वर्चुअली एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया। इस शिखर सम्मेलन के दौरान, देशों ने 5जी तकनीक में एक साथ काम करने का फैसला किया।

मुख्य बिंदु

2017 में इज़राइल यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की शुरुआत की थी। सुरक्षा चिंताओं के कारण शिखर सम्मेलन के परिणामों का खुलासा नहीं किया गया था।

भारत-इजराइल

इजरायल भारत का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। यह इजरायल के रक्षा निर्यात का 40% हिस्सा है। इसमें बराक मिसाइलें, एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) पर शक्तिशाली फाल्कन रडार शामिल हैं। भारत में ड्रोन का बेड़ा पूरी तरह से इजरायल की तकनीक पर आधारित है और कुछ सीधे इजरायल से खरीदे गये हैं। इजरायली ड्रोन के अलावा, DRDO (रक्षा अनुसंधान विकास संगठन) ने भारत, रुस्तम जैसे ड्रोन भी विकसित किए हैं। भारत ड्रोन स्वदेशी रूप से विकसित किए गए निगरानी ड्रोन हैं जो पहले से ही वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी कर रहे हैं। दूसरी ओर, रुस्तम ऐसे ड्रोन हैं जिन्हें विकसित किया जा रहा है। रुस्तम ड्रोनम हेरॉन ड्रोन की जगह लेगा। हेरॉन का विकास इजरायल ने किया था।

भारत-अमेरिका

भारत अमेरिका से 10 बिलियन अमरीकी डालर मूल्य के रक्षा उपकरण आयात करता है।  भारत और अमेरिका ने हाल के वर्षों में मजबूत रक्षा संबंध विकसित किए हैं। हाल के कुछ घटनाक्रम इस प्रकार हैं :

  • 2018 में, भारत सामरिक व्यापार प्राधिकरण के तहत लाइसेंस-मुक्त अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी की खरीद में मंजूरी प्राप्त करने वाला तीसरा देश बना।
  • 2 + 2 संवाद: यह बातचीत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच होती है। इसका उद्देश्य सुरक्षा प्रयासों में तालमेल को बढ़ावा देना है।
  • रक्षा प्रौद्योगिकी व्यापार पहल, जिसे डीटीटीआई भी कहा जाता है, जिसका उद्देश्य देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को आसान बनाना है और रणनीतिक मूल्यों के साथ सह-विकास में संभावनाओं की खोज करना है।
  • भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने COMCASA (Communications Compatibility and Security Agreement) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत और अमेरिका को एन्क्रिप्टेड संचार उपकरण साझा करने की अनुमति देता है।
  • अमेरिका ने भारत को STA-1 के रूप में नामित किया। STA रणनीतिक व्यापार प्राधिकरण है जो देश को संयुक्त राज्य अमेरिका से उन्नत अत्याधुनिक तकनीक खरीदने की अनुमति देता है।

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