भारत और ईरान के बीच दोहरे कराधान समझौता को टालने की स्‍वीकृति

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और ईरान के बीच दोहरे कराधान को टालने और वित्‍तीय करवंचना की रोकथाम के लिए समझौते को अपनी स्‍वीकृति दे दी है।
यह समझौता उन्‍हीं तर्जों पर हैं जिन पर भारत ने अन्‍य देशों के साथ समझौता किया है।

मुख्य तथ्य

समझौते से निवेश, टेक्‍नोलॉजी तथा भारत से ईरान और ईरान से भारत में कर्मियों के प्रवाह में तेजी आयेगी। यह समझौता नवीनतम अन्‍तर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुसार समझौता करने वाले दोनों पक्षों के बीच सूचना का आदान-प्रदान का प्रावधान करेगा और दोहरे कराधान को रोकेगा। यह समझौता टैक्‍स के मामलों में पारदर्शिता में सुधार लायेगा और टैक्‍स चोरी तथा टैक्‍स को टालने पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगा। यह समझौता जी-20 ओईसीडी बेस इरोजन एंड प्रोफिट शिफ्टिंग (बीईपीएस) परियोजना के अंतर्गत संधि से संबंधित न्‍यूनतम मानकों को पूरा करता है। इस परियोजना में बराबर के सहभागी के रूप में भारत ने हिस्‍सा लिया।

पृष्ठभूमि

केन्‍द्र सरकार अपने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 90 के अंतर्गत किसी भी देश या निर्दिष्‍ट भूभाग के साथ समझौता कर सकती है। इसके तहत केन्‍द्र सरकार आय पर दोहरे कराधान से बचने, करवंचना संबंधी सूचना के आदान-प्रदान या आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत कर योग्‍य आय के संबंध में समझौता कर सकती है।

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