भारत के विधि आयोग ने एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की

एक श्वेत पत्र मसौदा जारी कर विधि आयोग ने लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराने की सिफारिश की गई है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में विधि आयोग ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय लेने का फैसला किया है।

मुख्य तथ्य

लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराने से राजनीतिक स्थिरता आएगी क्योंकि किसी राज्य में अगर कार्यकाल खत्म होने के पहले भी कोई सरकार गिर जाती है या फिर चुनाव के बाद किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता तो वहां आनन-फानन में नहीं बल्कि पहले से तय समय पर ही चुनाव होगा। इससे राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी।

लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे चुनावी खर्च में काफी बचत होगी। केंद्र सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि दोनों चुनाव एक साथ कराने से तकरीबन 4,500 करोड़ रुपये की बचत होगी।

विधि आयोग की प्रमुख सिफारिशें

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और लोकसभा तथा विधानसभाओं के नियमों में संशोधन करके देश में 2019 में लोकसभा के साथ समकालिक चुनावों में विधायकों का चुनाव एक साथ मिलकर किया जा सकता है। 2024 में शेष राज्यों का चुनाव होने वाले आम चुनाव के साथ किया जा सकता है।
आयोग के अनुसार नई लोकसभा या विधानसभा मध्यावधि चुनाव के मामले में केवल पिछली लोकसभा/विधानसभा की शेष अवधि के लिये ही सेवा करेगी, न कि पाँच साल की अवधि के लिये।
केंद्र को आयोग के अनुसार संविधान में संशोधन करना चाहिये, यदि सहमति हो, तो सभी राज्यों द्वारा इसकी पुष्टि होनी चाहिये ताकि किसी भी चुनौती से बचा जा सके।

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