भारत छह पनडुब्बियों की खरीद के लिए बोली प्रक्रिया शुरू करेगा

भारतीय नौसेना 24 नई पनडुब्बियों का अधिग्रहण करेगी। यह भारत की अंडरवाटर फाइटिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। भारत  सितंबर 2020 में इन पनडुब्बियों की खरीद की बोली प्रक्रिया शुरू करेगा।

मुख्य बिंदु

यह पनडुब्बियां भारत में बनाई जाएँगी। इनमें से छह परमाणु अटैक पनडुब्बियां हैं और 55,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। इस मेगा प्रोजेक्ट को P-75 I नाम दिया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने पहले ही परियोजना के लिए पांच रक्षा बड़ी कंपनियों का चयन कर लिया है। यह कंपनियां हैं :

  • एलएंडटी ग्रुप
  • सरकारी स्वामित्व वाला मझगांव डॉक्स लिमिटेड
  • ThyssenKrupp मरीन सिस्टम
  • नवान्टिया (स्पेन)
  • नेवल ग्रुप  (फ्रांस)

उपर्युक्त पाँच कंपनियां मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत में जहाजों का निर्माण कार्नेगी। भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में 15 पारंपरिक पनडुब्बियां और दो परमाणु पनडुब्बियां हैं।

महत्व

पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में। हिंद महासागर भारत के सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

भारतीय नौसेना क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के चीन के बढ़ते प्रयासों का मुकाबला करने के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। चीन के पास 50 पनडुब्बी और लगभग 350 जहाज हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि चीन के पास अगले आठ से दस वर्षों में 500 जहाज और पनडुब्बियां होंगी। इसलिए, चीन का मुकाबला करने के लिए भारत के लिए अपनी नौसेना को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

योजना क्या है?

भारतीय नौसेना 57 कैरिएर बोर्न लड़ाकू जेट, 111 नौसेना उपयोगिता हेलीकॉप्टर और 123 बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया में है। हाल ही में, भारत ने देश में रक्षा वस्तुओं के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 101 सैन्य वस्तुओं जैसे क्रूज मिसाइल, सोनार सिस्टम, लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, पारंपरिक पनडुब्बियों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मई 2020 में, सरकार ने घोषणा की कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 49% से बढ़ाकर 74% किया जा रहा है। यह उम्मीद की जाती है कि भारतीय सशस्त्र बल अगले पांच वर्षों में लगभग 130 बिलियन डॉलर पूंजी खरीद में खर्च करेंगे।

आगे का रास्ता

रक्षा मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में रक्षा विनिर्माण में 25 बिलियन अमरीकी डालर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह 1.75 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। साथ ही, उसने 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

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