भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की

भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की है। इस प्राधिकरण का मुख्यालय गुजरात के गांधीनगर में स्थापित किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

इस प्राधिकरण की स्थापना एक अधिसूचना के माध्यम से की गयी। भारत सरकार द्वारा जारी यह अधिसूचना IFSCA अधिनियम, 2019 के कुछ प्रभावों को लागू करती है। यह प्राधिकरण भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय बाजारों को विनियमित करेगा। इस प्राधिकरण का मुख्य कार्य वित्तीय उत्पादों को विनियमित करना है जैसे कि बीमा के अनुबंध, जमा, वित्तीय संस्थानों की प्रतिभूतियां जिन्हें नियामकों द्वारा अनुमोदित किया गया है। इन नियामकों में RBI, SEBI, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण, IRDAI शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA)

इस प्राधिकरण में 9 सदस्य हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। इन सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। इसके सदस्यों में अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय के दो सदस्य, RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA के एक-एक सदस्य और खोज समिति की सिफारिश के आधार पर दो सदस्य शामिल होते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र कॉर्पोरेट्स, व्यक्तियों और सरकारों को फंड जुटाने की सेवाएं प्रदान करेगा। यह वैश्विक कर प्रबंधन, धन प्रबंधन, विलय, जोखिम प्रबंधन संचालन आदि पर भी फोकस करेगा।

IFSCA भारत में IFSCs के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा। इससे सेबी, आरबीआई और आईआरडीएआई जैसे अन्य कई नियामकों का बोझ कम होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि वर्तमान में सभी बीमा व पूंजी बाजार उनके द्वारा विनियमित किए जा रहे हैं।

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