भारत सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल खर्च को 2025 तक 1.15% से बढ़ाकर 2.5% करेगी

27 सितंबर, 2020 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने घोषणा की कि भारत सरकार 2025 तक देश में स्वास्थ्य देखभाल खर्च को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाएगी। वर्तमान में, सरकार स्वास्थ्य देखभाल की ज़रुरत को पूरा करने के लिए जीडीपी का 1.15% खर्च कर रही है।

मुख्य बिंदु

यह वृद्धि पंद्रहवें वित्त आयोग के उच्च-स्तरीय समूह की सिफारिश के आधार पर की जा रही है। इस वृद्धि की जानकारी मंत्री ने अपने “रविवार संवाद” के दौरान प्रदान की।

रविवार संवाद

यह सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के साथ केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का एक इंटरैक्टिव कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दिए।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। महामारी ने इस प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता उत्पन्न कर दी है। इसके अलावा, शहरी स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता है।

भारत को स्वास्थ्य पर खर्च क्यों बढ़ाना चाहिए?

इटली और चीन की तुलना में भारत महामारी से ज्यादा प्रभावित है। ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी रैंक में भारत 57वें स्थान पर है । स्वास्थ्य पर भारत का खर्च अन्य उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है।

चुनौतियां

भारत में, स्वास्थ्य व्यय राज्यों द्वारा संचालित होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। समेकित रोग निगरानी कार्यक्रम कई बार रीलॉन्च किया, यह मानव शक्ति और संसाधनों के लिए के अभाव से ग्रसित है। इस कार्यक्रम को भारत में महामारी के खिलाफ रक्षा की पहली पंक्ति माना जाता है।

देश में स्वास्थ्य व्यय जरूरत तक के अनुरूप नहीं है। निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर केवल 7% खर्च होता है और उपचार पर 80% खर्च होता है।

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