भारत सरकार PM-KISAN के अवैध लाभार्थियों की पहचान करेगी

26 अगस्त, 2020 को भारत सरकार ने घोषणा की कि वह PM-KISAN योजना के अवैध लाभार्थियों को ट्रैक करेगी। यह कार्य कृषि मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।

यह कार्य कैसे किया जाएगा?

कृषि मंत्रालय वित्त मंत्रालय से केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों का डाटा प्राप्त करेगा। डाटा का पीएम-किसान के लाभार्थियों की सूची के साथ मिलान किया जायेगा। इसी तरह, डाटा को आयकर विभाग के साथ भी जांचा जाएगा। कृषि मंत्रालय यह जाँच करेगा कि क्या पीएम-किसान योजना के कोई लाभार्थी आयकरदाता हैं या नहीं।

यह क्यों किया जा रहा है?

PM-KISAN योजना किसानों को सालाना तीन किस्तों में 6,000 रुपये प्रदान करती है। इस योजना में सेवानिवृत्त और सेवारत सरकारी कर्मचारियों, आयकर दाता, डॉक्टर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, जन प्रतिनिधि, पूर्व सांसद और उच्च आर्थिक स्थिति वाले अन्य लोगों को शामिल नहीं किया गया है। यह कृषि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि इन अयोग्य व्यक्तियों को अवैध रूप से पीएम-किसान लाभ प्राप्त हो रहा है।

PM-KISAN के लाभार्थी

यह योजना कृषि मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है। हालांकि, लाभार्थियों की पहचान की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के पास है। यह योजना मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लक्षित करती है।

PM-KISAN योजना

पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य इस योजना को लागू कर रहे हैं। इस योजना को 2019 में संशोधित किया गया था। संशोधित योजना का लक्ष्य 2 करोड़ किसानों को शामिल करना था।  यह 2 हेक्टेयर तक खेती योग्य भूमि वाले किसानों पर केंद्रित है। दूसरे शब्दों में, यह कमजोर भूमिहीन किसान परिवारों को लक्षित करती है।

अन्य राज्यों द्वारा इसी तरह के कार्यक्रम

भावान्तर भुगतान योजना

  • यह मध्य प्रदेश में लागू की जा रही है
  • इसका उद्देश्य एमएसपी और बाजार मूल्यों के बीच अंतर प्रदान करके किसानों को राहत देना है

रायथु बंधु योजना

  • इसे तेलंगाना सरकार ने लागू किया है
  • यह राज्य के सभी किसानों को हर सीजन में 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रदान करती है

कालिया

  • KALIA का पूर्व स्वरुप Kurushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation है
  • इसे ओडिशा राज्य सरकार द्वारा ओडिशा में लागू किया गया है
  • यह दो किस्तों में सालाना 10,000 रुपये प्रदान करती है।

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