मणिपुर ब्लैक राइस, गोरखपुर टेराकोटा और कोविलपट्टी कदलाई मितई को GI टैग दिया गया

30 अप्रैल, 2020 को मणिपुर के काले चावल (चक-हाओ),गोरखपुर टेराकोटा और कोविलपट्टी की कदलाई मितई को भौगोलिक संकेत प्रदान किया गया।

मुख्य बिंदु

चक हाओ के लिए भौगोलिक संकेत प्राप्त करने के लिए आवेदन उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम लिमिटेड (NERAMAC) द्वारा शुरू किया गया था।

काला चावल

इस चावल की किस्म का रंग गहरा काला होता है और अन्य चावल की किस्मों जैसे भूरे चावल आदि की तुलना में इसका वजन अधिक होता है। एंथोसायनिन एजेंट के कारण इसका रंग काला होता है। यह चावल मिष्ठान, दलिया बनाने के लिए उपयुक्त है। यह चीन की पारंपरिक रोटी, नूडल्स और राइस केक व्यंजनों में उपयोग किया जाता है।

कोविलपट्टी कदलाई मितई

कदलाई मितई एक मूंगफली की कैंडी है जो तमिलनाडु के दक्षिणी भागों में बनाई जाती है। इस कैंडी को मूंगफली और गुड़ से तैयार किया जाता है। इसके लिए विशेष रूप से थामीबरानी नदी का पानी उपयोग किया जाता है। क्षेत्र के उत्पादकों के अनुसार इस विशेष नदी का पानी कैंडी के स्वाद को बढ़ाता है।  थामीररानी नदी पश्चिमी घाट में निकलती है और मुन्नार की खाड़ी में बहती है। यह तमिलनाडु की एक बारहमासी नदी है।

गोरखपुर टेराकोटा

गोरखपुर का टेराकोटा सदियों पुराना है। शहर के कुम्हार हाथी, घोड़े जैसे जानवरों की आकृतियाँ बनाते हैं। बनाई गई कला के प्रत्येक टुकड़े में अधिक मेहनत है, परन्तु इसका पारिश्रमिक अधिक नही मिलता। जीआई टैग कुम्हारों की आय बढ़ाने में मदद करेगा।

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