राष्ट्रपति ने दी असम डायन प्रताड़ना विरोधी बिल, 2015 को मंज़ूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने असम डायन प्रताड़ना विरोधी (निषेध, रोकथाम व बचाव) बिल, 2015 को मंज़ूरी दी। इस विधेयक का उद्देश्य असम में डायन प्रताड़ना की बढती घटनाओं पर रोक लगाना है। डायन प्रताड़ना जैसे कुरीतियाँ मानवाधिकारों का हनन हैं।

मुख्य बिंदु

इस विधेयक के द्वारा समाज से अंधविश्वास को समाप्त करने में सहायता मिलेगी। इस बिल के द्वारा किसी व्यक्ति को डायन घोषित करना एक गैर-ज़मानती व दंडनीय अपराध होगा। इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, यदि किसी व्यक्ति को डायन प्रताड़ना का दोषी पाया जाता है तो उसके लिए 7 वर्ष की कैद की सजा तथा 5 लाख रुपये तक के जुर्माने के प्रावधान है। यदि डायन प्रताड़ना में किसी की मृत्यु हो जाती है तो इसके लिए भारतीय दंड सहित की धारा 302 (हत्या के लिए सजा) के तहत करवाई की जाएगी।

यदि किसी व्यक्ति को प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा, बिमारी अथवा मृत्यु का कारण माना जाता है, तो इसके लिए दोषियों को 3 वर्ष तक की कैद की सजा दी जा सकती है। इस विधेयक के तहत पंजीकृत मामलों का निपटारा विशेष न्यायालय में किया जायेगा। इसके लिए विशेष न्यायालय की स्थापना उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद के बाद की जाएगी।

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