राष्ट्रपति ने भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899 में संशोधन को मंज़ूरी दी

राष्ट्रपति भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899 में संशोधन को मंज़ूरी दे दी है।

प्रस्तावित संशोधन

  • एक कानूनी व संस्थागत मैकेनिज्म का निर्माण जिसकी सहायता से राज्य सिक्यूरिटी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स से स्टैम्प शुल्क एकत्रित कर सकें।
  • राज्यों में क्रेताओं के अनुपात में स्टैम्प शुल्क की हिस्सेदारी।
  • एक समन्वय परिषद् का गठन किया जायेगा, इसमें संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह परिषद् स्टैम्प शुल्क दर की समीक्षा अथवा इसमें समीक्षा कर सकती है।

स्टैम्प शुल्क दर

  • महाराष्ट्र की सीमा शुल्क के आधार पर दरों का निर्धारण किया जायेगा क्योंकि कुल स्टैम्प शुल्क में से 70% हिस्सा केवल महाराष्ट्र का ही होता है।
  • यह दरें इस प्रकार निर्धारित की जायेंगी जिससे निवेशकों पर भी कर का भार अधिक न पड़े।
  • वित्तीय सिक्यूरिटी पर क्रेता अथवा विक्रेता द्वारा स्टैम्प शुल्क का वहां किया जायेगा, वर्तमान में दोनों  को स्टैम्प शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।

प्रस्तावित संशोधन का लाभ

इन संशोधन के द्वारा स्टैम्प शुल्क का तर्कसंगत भार निश्चित किया जायेगा, इससे कर चोरी में कमी आएगी। शुल्क एकत्रीकरण की लागत को न्यूनतम किया जायेगा जबकि उत्पादकता में वृद्धि की जायेगी। केंद्रीकृत संग्रहण मैकेनिज्म के कारण राजस्व में भी स्थायित्व आएगा तथा शुल्क संग्रहण में भी वृद्धि होगी।

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