वाणिज्यिक विवादों के शीघ्र निवारण के लिए लोक सभा ने पारित किया विधेयक

लोक सभा ने कमर्शियल कोर्ट्स, कमर्शियल डिवीज़न व कमर्शियल अपीलीय हाई कोर्ट डिवीज़न (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया। यह बिल मई 2018 में राष्ट्रपति द्वारा लागू किये गए अध्यादेश का स्थान लेगा। इस विधेयक के द्वारा कमर्शियल कोर्ट्स, कमर्शियल डिवीज़न व कमर्शियल अपीलीय हाई कोर्ट डिवीज़न (संशोधन) विधेयक, 2015 में संशोधन किया गया।

इस अधिनियम के द्वारा उच्च न्यायालय में कमर्शियल डिवीज़न तथा जिला न्यायालय में कमर्शियल कोर्ट की स्थापना की व्यवस्था की गयी है। इनका उपयोग वाणिज्यिक विवादों को निपटाने के लिए किया जायेगा। इस संशोधन का उद्देश्य भारत में व्यापार करने की स्थितियों में सुधार करना है।

मुख्यबिंदु

धन सम्बन्धी सीमा में कमी : आरम्भ में उच्च न्यायालय के कमर्शियल डिवीज़न 1 करोड़ रुपये से ऊपर के मामलों की सुनवाई करते थे, अब इस सीमा को कम करके 3 लाख रुपये किया गया है।

कमर्शियल कोर्ट की स्थापना : मूल अधिनियम में राज्य को उच्च न्यायालय से विचार विमर्श करने के बाद जिला स्तर पर कमर्शियल कोर्ट स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गयी थी। यदि किसी मामले का मूल क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालय के अधीन था, इस स्थिति में इस प्रकार के कमर्शियल कोर्ट स्थापित करने पर मनाही थी। इस बिल के द्वारा उपरोक्त स्थिति में भी कमर्शियल कोर्ट स्थापित किये जा सकते है।

कमर्शियल अपीलीय न्यायालय : इस बिल के द्वारा राज्य सरकार जिला स्तर पर कमर्शियल अपीलीय न्यायालय की अधिसूचना जारी कर सकती है।

मध्यस्थता : इस बिल के द्वारा मध्यस्थता की व्यवस्था भी की गयी है, इसके तहत सभी पक्ष कमर्शियल विवाद को कोर्ट के दायरे के बाहर अथॉरिटीज के निगरानी में मध्यस्थता की व्यवस्था है।

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