शिव सेना ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी

शिव सेना ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इससे पहले महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद सरकार का गठन न होने के कारण अब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। महाराष्ट्र में यह राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356(1) के तहत लागू किया गया है।

पृष्ठभूमि

विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में 105 सीटें प्राप्त हुई। भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना को 56 सीटें प्राप्त हुई। अतः महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन की सरकार बनने के आसार थे, परन्तु  मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों में सहमती नहीं बन सकी।

चुनावों में एनसीपी को 54 सीटें प्राप्त हुई हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 44 सीटें प्राप्त हुई हैं। एमएनएस को एक सीट प्राप्त हुई है, जबकि अन्य दलों को 28 सीटें प्राप्त हुई हैं।

महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, इसमें 234 सीटें सामान्य वर्ग, 29 सीटें अनुसूचित जाती तथा 25 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

अनुच्छेद 356(1)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार यदि किसी राज्य में सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चलाई जा रही है तो राष्ट्रपति उक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं। यह निर्णय राज्य में संवैधानिक मशीनरी फेल होने के परिणामस्वरूप लिया जाता है। राष्ट्रपति शासन एक समय में 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है, बाद में लोकसभा व राज्यसभा की सहमती से इस अवधि को अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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