सत्य पाल मलिक को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया

18 अगस्त, 2020 को सत्य पाल मलिक को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने तथागत रॉय का स्थान लिया। श्री मलिक ने पहले गोवा के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

उनके स्थानांतरण के बाद, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी गोवा के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करेंगे।

सत्य पाल मलिक

मलिक ने 2018-19 में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। यह उनके कार्यकाल के दौरान अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के संवैधानिक निर्णय को लागू किया गया था।

1974 में उन्हें उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सदस्य के रूप में चुना गया। उन्हें 1980-86 में राज्यसभा प्रतिनिधि के रूप में चुना गया। उन्होंने 2017-18 में बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। 2018 में, उन्हें ओडिशा के राज्यपाल के रूप में कार्य करने के लिए अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

राज्यपाल

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 153 से अनुच्छेद 162 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति, शक्तियां और उनके कार्यालय की चर्चा की जाती है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।

एक व्यक्ति के राज्यपाल बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए :

  • भारत का नागरिक
  • वह संसद या राज्य विधायिका का सदस्य नहीं होना चाहिए
  • वह लाभ के पद पर नही होना चाहिए
  • उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए

राज्यपाल के कार्यकाल की समाप्ति

एक राज्यपाल का कार्यकाल पाँच वर्षों के लिए होता है, परन्तु वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद पर बना रहता है। हालाँकि, निम्नलिखित कारणों से राज्यपाल के कार्यकाल को समाप्त  कर दिया जा सकता है :

  • महामहिम राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर राज्यपाल को बर्खास्त किया जा सकता है
  • यदि राष्ट्रपति द्वारा उनके कृत्यों को असंवैधानिक पाए जाते हैं , तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा
  • यदि वह राष्ट्रपति को संबोधित इस्तीफा देते हैं तो उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है।

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ निम्नलिखित हैं  :

  • जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री के रूप में एक उम्मीदवार का चयन करने का विवेक होता है
  • राष्ट्रपति शासन लागू करना
  • वह अपने विवेक पर या राष्ट्रपति के निर्देश पर राज्य के मामलों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है
  • यदि राष्ट्रपति द्वारा अनुमति दी जाती है तो वह आपातकाल के दौरान मंत्रिपरिषद की सलाह को रद्द कर सकता है।

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