13 जून : अंतर्राष्ट्रीय अल्बिनिज्म जागरूकता दिवस

प्रतिवर्ष 13 जून को अंतर्राष्ट्रीय अल्बिनिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अल्बिनिज्म से प्रभावित लोगों के विरुद्ध होने वाले हमलों तथा भेदभाव के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है।

अल्बिनिज्म क्या है?

यह एक दुर्लभ तथा वंशानुगत रोग है, इस रोग से पीड़ित व्यक्ति की त्वचा, बाल तथा आँखों में आंशिक अथवा पूर्ण रूप से मेलेनिन पिगमेंट नहीं होता। अल्बिनिज्म किसी भी लिंग अथवा नस्ल के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इसका कोई उपचार नहीं है। त्वचा में मेलेनिन  न होने के कारण प्रभावित व्यक्ति सनबर्न तथा त्वचा कैंसर से पीड़ित हो सकता है। यह फोटोफोबिया, अम्ब्लायोपिया, निस्टैगमस जैसे चक्षु रोग से भी सम्बंधित है।

अल्बिनिज्म से प्रभावित व्यक्ति की त्वचा पर सफ़ेद धब्बे होते हैं अथवा कई बार पूर्ण त्वचा ही सफ़ेद हो जाती है। इसके कारण अल्बिनिज्म से पीड़ित लोगों को कई प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

मेलेनिन : यह एक किस्म का जटिल पॉलीमर होता है, यह एमिनो एसिड टायरोसीन से उत्पन्न होता है। इसके द्वारा त्वचा तथा बालों का रंग निर्धारित होता है।

पृष्ठभूमि

कनाडा की एक गैर-सरकारी संस्था “अंडर द सेम सन” ने युसूफ मोहम्मद इस्माइल बारी-बारी (संयुक्त राष्ट्र में सोमालियन मिशन के एम्बेसडर) के साथ मिलकर अल्बिनिज्म से प्रभावित लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव को पारित करने का प्रयास किया। 13 जून, 2013 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने अल्बिनिज्म पर पहले प्रस्ताव को पारित किया। 26 जून, 2014 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने प्रस्ताव 26/10 के द्वारा ने 13 जून को अंतर्राष्ट्रीय अल्बिनिज्म जागरूकता दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसम्बर, 2014 को प्रस्ताव 69/170 के द्वारा 13 जून को  अंतर्राष्ट्रीय अल्बिनिज्म जागरूकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।

 

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