153 देशों के 11,000 वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल घोषित किया

बायोसाइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक पत्र में 11,258 हस्ताक्षरकर्ताओं (69 भारतीय शामिल) ने वैश्विक जलवायु आपातकाल घोषित किया है। इस रिपोर्ट का नाम ‘वर्ल्ड साइंटिस्ट्स’ है। यह 40 वर्ष के डाटा के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है। इसमें 1979 में जिनेवा में प्रथम जलवायु सम्मेलन के बाद से जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित प्रमुख सूचकों को प्रदर्शित किया गया है।

मुख्य बिन्दु

वैज्ञानिकों ने ‘महत्वपूर्ण चिन्ह’ नामक इस सूची तैयार की है, इससे जलवायु परिवर्तन की स्थिति स्पष्ट होती है। इस रिपोर्ट में हवाई यात्रा, मांस उत्पादन, प्रजनन दर इत्यादि को जलवायु परिवर्तन के कारकों की सूची में डाला गया है।

इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के 14 प्रभावों का वर्णन किया गया, इसमें अत्याधिक विषम मौसम, समुद्री ऊष्मा की मात्र, महासागरीय अम्लीयता इत्यादि शामिल हैं।

इसमें जीवाश्म इंधन के उपयोग को कम करने की अनुशंसा की गयी है।

इस रिपोर्ट के 6 उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

  • जीवाश्म इंधन को स्थानापन
  • पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा
  • मीथेन जैसे प्रदूषकों में कमी करना।
  • मांस का कम उपभोग
  • अर्थव्यवस्था को कार्बन-मुक्त बनाना
  • जनसँख्या वृद्धि दर को स्थिर करना

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