ICMR अध्ययन : भारत 2030 तक एड्स सम्बन्धी लक्ष्य को हासिल करने से चूक सकता है

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने चेतावनी दी है कि भारत के 2030 तक देश में एड्स को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य से चूकने की संभावना है। परिषद के अनुसार, यह मुख्य रूप से COVID-19 के कारण कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रुकी हुई प्रगति के कारण है।

 

मुख्य बिंदु

ICMR के अनुसार, 2010 और 2017 के बीच वार्षिक नए एचआईवी संक्रमणों की वार्षिक गिरावट 27% थी। नए लक्ष्य के तहत, भारत सरकार ने 2020 तक देश में एड्स को 75% तक कम करने का इरादा किया है। यह अत्यधिक महत्वाकांक्षी लगता है और अब COVID-19 संकट के साथ चुनौतीपूर्ण हो गया है।

अध्ययन

अध्ययन के अनुसार 2017 में पुरुष में एचआईवी का राष्ट्रीय वयस्क प्रसार 0.22% था। मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड राज्यों में 1% से अधिक का प्रचलन था। 2017 में एड्स से प्रभावित लोगों की संख्या 2.1 मिलियन थी। महाराष्ट्र में यह संख्या सबसे अधिक है।अकेले 2017 में, देश में 88,000 वार्षिक नए एड्स के मामले सामने आए। देश में एड्स के कारण मरने वालों की संख्या सालाना 69,000 है।

राज्यवार आंकड़े

सबसे अधिक एचआईवी वाले लोग महाराष्ट्र (0.33 मिलियन), आंध्र प्रदेश (0.27 मिलियन), कर्नाटक (0.24 मिलियन) में हैँ। अन्य राज्य जिनमें एड्स संक्रमित मामलों की संख्या सबसे अधिक थी, वे थे पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश। इन राज्यों में 0.2 से 0.1 मिलियन मरीज हैँ।

अध्ययन कहता है कि असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और उत्तराखंड के कम बोझ वाले राज्यों में नए संक्रमण बढ़ रहे हैं।

लक्ष्य

भारत में महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए थे जैसे कि माँ से बच्चे के संक्रमण (पीएमटीसीटी) को रोकना। लक्ष्य 2020 तक प्राप्त किया जाना है। तेलंगाना, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक पीएमटीसीटी था।

Advertisement

Month:

Categories:

Tags: , , , ,